व्यंग्य राजनीतिक व्यंग्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
व्यंग्य राजनीतिक व्यंग्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, मार्च 21, 2010

व्यंग्य - गडकरी का लाफ्टर चैलेन्ज शो


व्यंग्य
गडकरी का लाफ्टर चैलेंज शो
वीरेन्द्र जैन
अरे ओ हिन्दुस्तान भर के मनहूसो अगर तुम्हारे दिमाग है तो कुछ तो महसूसो। तुम्हारी मनहूसियत को मिटाने आ गया है जनाब गडकरी जी का दि ग्रेट गडकरी लाफ्टर चैलेंज शो। तुतींतींतींतींतीं तींतींतींतींतीं डमाडम डमाडम डमाडम डमाडम इसे देखने के बाद चाहे जितना हँस लो। यह देखने के बाद आपकी सारी मनहूसियत विदा हो जायेगी और हो सकता है कि आपका स्वास्थ गडकरी जी से होड़ लेने लगे। इस लाफ्टर चैलेंज शो में सम्मलित हैं लाफ्टर की दुनिया के मशहूर मारूख नवजोत सिंह सिद्धू जो बिना बात के भी हँस सकते हैं और कलाकारों के अश्लील चुटकलों को अपनी हथेली की थाप और कुर्सी पर देह को दुहरा कर उससे भी ज्यादा अश्लील बना सकते हैं जितना कि वह वास्तव में हो सकता है। अगर आपको अश्लीलता पसन्द नहीं और मारधाड़ ही पसन्द है तो वे उसमें भी पीछे नहीं है अपितु एकाध हत्या का मामला तो उन पर विचाराधीन ही है। वह भी पसन्द नहीं हो तो वो क्रिकेट खिलाड़ी भी रहे हैं और इसी लोकप्रियता को भुनाने के लिए ही तो भाजपा ने उन्हें सजा रखा है भले ही उनके कारण पार्टी की पंजाब इकाई में दनादन हो रही हो।
अगर क्रिकेट भी पसन्द नहीं तो भी हाल से बाहर जाने की ज़रूरत नहीं अभी बैठे रहिये गडकरी जी की नाटक मंडली में मनोरंजन का पूरा इंतज़ाम है। उनके पास हैं दुनिया की मशहूर नृत्यांगना और कलाकार श्रीमती..... नहीं नहीं .. सुश्री हेमा मालिनी.... अब इनका क्या परिचय दें इनका परिचय देना तो सूरज को दीपक दिखाना है। खेद है कि इनके मित्र धर्मेन्द्र जिन्होंने पार्टी के सांसद रहते हुये भी कहा था कि पार्टी ने उन्हें इमोशनली ब्लेकमेल किया अब किसी पद पर नहीं हैं और जिस दिन सुश्री हेमा मालिनी को पार्टी का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया उसी दिन इस इमोशनली ब्लेकमेल हुये कलाकार को छोटा सा अटैक आया। कोई बात नहीं इमोशंस में सब चलता है।
अगर नृत्यांगना नहीं चाहिये, घरेलू बहू चाहिये तो वह भी इसी नाटक मंडली में ही मिलेगी। मिलिये पार्टी की सचिव स्मृति ईरानी से। अगर ईरानी नहीं हिन्दुस्तानी रानी पसन्द हैं तो वह भी हैं, श्रीमती वसुन्धरा राजे सिन्धिया जो राजस्थान में पार्टी का भट्टा बैठाने के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर नमूदार हो रही हैं, जिन्होंने पहले अध्यक्ष को ऐसा नाच नचवाया कि बेचारे न घर के रहे न घाट के। अगर फिर भी ग्लैमर की कमी महसूस कर रहे हों तो बता दें कि एक और टीवी कलाकार वाणी त्रिपाठी भी हैं। क्या कह रहे हैं आप कि ऎंग्री यंग मैन के बिना कहानी में मज़ा नहीं आता तो दुखी न हों गडकरी की मन्डली में वरुण गांधी हैं जो अपनी माँ के पशु प्रेम के कारण धर्मेन्दरजी की तरह किसी कुत्ते का खून पीने में भरोसा नहीं करते अपितु केवल हाथ काट देने की धमकी देते हैं। वैसे कलाकारों की कमी तो पहले भी नहीं थी और ज़रूरत पड़ने पर विनोद खन्ना, शत्रुघन सिन्हा, दारा सिंह, नीतीश भारद्वाज, दीपिका चिखलिया, अरविन्द त्रिवेदी, आदि मेहमान कलाकारों की भूमिका निभाने वाले पहले से ही मौजूद हैं, सो जहाँ भीड़ जुटाना होगी सो जुटा फैंकेंगे। कुल दस प्रतिशत वोट बढाने का ही तो वादा किया है, और अब तो अमिताभजी भी मोदीजी के सम्पर्क में हैं।
यह हिन्दी पट्टी वालों की फिल्म कम्पनी है इसलिये दक्षिण के कलाकारों को कम जगह मिली है वैसे भी दक्षिण में जिस व्यापारी से अनैतिक समझौता करके सत्ता हथियाई थी वह संसद में विपक्ष की नेता का कृपापात्र है सो उसने ऐसा कोड़ा फटकारा कि येदुरप्पा को शोभाहीन कर दिया। ऐसा लगता है कि यह मंडली आम सभाओं में भीड़ खूब जुटायेगी क्योंकि मुलायम मंडली में से ठाकुर अमर सिंह के साथ जयाप्रदा, जया बच्चन, और संजय दत्त के निकल जाने के बाद पहलवान की यादव डेयरी बची है सो मनोरंजन के लिये सबको इस रामलीला नाटक मंडली का ही सहारा मिलेगा। मंथरा भी अपना रास्ता बना चुकी हैं बस चुपचाप मौके की तलाश में हैं सो पहला शो मध्य प्रदेश में ही होगा।
वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा टाकीज के पास भोपाल मप्र
फोन 9425674629

शनिवार, मार्च 20, 2010

व्यंग्य- पड़ोसी प्रेम्

व्यंग्य
पड़ौसी प्रेम
वीरेन्द्र जैन
जिनसे हमारे सबंध खराब होते हैं, वे मुझे पड़ोसी की तरह लगने लगते हैं क्योकि किसी पड़ोसी से हमारे सबंध कभी अच्छे नहीं रहे। इस मामले में हमारा हाल भारत सरकार जैसा है न उनके सबंध पड़ोसियों से अच्छे रहते है, और न हमारे। पाकिस्तान से तो हमारे खराब सम्बंधों का इतिहास उतना ही पुराना है कि जितना कि खुद पाकिस्तान। फिर हमें अपने शत्रुओं की संख्या में में कुछ कमी नजर आयी तो हमने और राहुल की दादी ने पाकिस्तान को दो टुकड़े होने में अपना पूरा आत्मीय समर्थन दिया जिससे हमारे एक की जगह दो दुश्मन हो गये। अब बंगलादेश भी हमारे सैनिकों की लाशों को बांस पर टांग कर वापिस भेजता है, त्रिपुरा और असम, नागालैण्ड और मणिपुर सहित सभी उत्तरपूर्व के आंतकवादी उसी तरह बंगलादेश में मेहमानवाजी करते हैं जैसे कि कश्मीर के आंतकवादी पाकिस्तान में। श्रीलंका के सैनिक हमारे प्रधानमंत्री को बट प्रहार से सलामी देते हैं और भूतपूर्व प्रधानमंत्री हो जाने पर उन्हें बम से उड़ा देते हैं। नेपाल के जो लोग नेपाल में ही रहते हैं वे सुबह सुबह उठकर भगवान पशुपतिनाथ का नाम बाद में लेते हैं, हमारे देश को गाली पहले देते हैं।

लगभग ऐसा ही सुख मुझे भी अपने पड़ोसियों से प्राप्त है चाहे वे हमारे दायें वालें हो या बायें वाले उपर वाले हो या नीचे वाले। मै बड़ी शान से कह सकता है कि देश की नीतियों पर ठीक तरह से चलने वाले नागरिकों में मेरा वही स्थान है जो गाजर के हलुवे में काजू का होता है। पड़ोसियों के दो ही तो काम होते हैं- एक-सार्वजनिक सुविधाओं का अधिकतम हिस्सा अपने लिए हड़पना और दूसरा- ऐसा करने वाले पड़ोसियों को न करने देना- और कर रहें हों तो उनसे लड़ना।

मनुष्य को एक सामाजिक प्राणी माना जाता है जिसका अर्थ होता है कि कोई उसके पड़ोस में रहता है तथा वह किसी के पड़ोस में रहता है। इस आस पास अलग- अलग रहने को ही सामाजिकता और प्रकारान्तर में पड़ोस कहते हैं। इन सामाजिक प्राणियों के सामाजिक सम्बध होते है जो आमतौर पर '' करेले और नीम चढ़े '' के होते है। एक तो बेचारा नीम पूरी बेल को अपने ऊपर चढ़ाये रहता है तथा फिर भी उसके मूल दुर्गण को बढ़ाने में अपने ऊपर दोष भी सहता है।

इतिहास बताता है कि पड़ोसियों के बीच पुराने समय में ही सम्बंध अच्छे नहीं रहते थे। यही कारण है कि ईसा मसीह को अपने भक्तों से कहना पड़ा कि अपने पड़ोसियों से प्रेम करो। यदि वे पहले से ही ऐसा कर रहे होते तो ईसा मसीह को ये उपदेश देने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

फिल्मों में भी पड़ोस के प्रेम के ज्यादा उदाहरण नहीं मिलते। देवदास, तेरे घर के सामने, पड़ोसन प्यार किये जा आदि में भी पड़ोसी और पड़ोसिनों के प्रेम के उदाहरण जरूर मिलते हैं पर पड़ोसी पडोसी के बीच तो दुश्मनी ही चलती रहती है। पड़ोसी के बीच ईर्षा चलती है, द्वेष चलता है, चुगलियां चलती है, पर प्रेम नहीं चलता।

बहुमंजिले भवनों और नई कालोनियों में रहने वाले तो जन्मजात शत्रु ही होते है। उनके घरों के दरवाजे खुले कम और बन्द ज्यादा रहते हैं आमने सामने रहने वाले शर्मा जी को वर्मा जी की ओर वर्मा जी को शर्मा जी की शकल कम और दरवाजे पर लटकी नेम प्लेट ज्यादा नजर आती है। पड़ोसियों के कारण ही दीवारों में कान हुआ करते थे और अब तो दरवाजों में आंख पैदा हो गयी है। वर्मा जी दरवाजा खोलने से पहले देख लेते हैं कि शर्मा जी तो नहीं निकल रहे और यही काम शर्मा जी के दरवाजे की आंख से भी होता है।

रहीम ने तो '' निन्दक नियरे राखिये '' कहकर पड़ोसी के चरित्र चिंतन में कोई कसर ही बाकी नहीं छोड़ी। घर छोड़ कर हिमालय की कन्दराओं में बसने की जरूरत पड़ोसी के कारण ही पड़ती होगी क्योकि पडोस छोड़े बिना शन्ति कहॉ सम्भव है। मिर्जा गालिब को इन्हीं पड़ोसियों के कारण ही कहना पड़ा होगा कि - रहिये अब ऐसी जगह चल कर जहां कोई न हो।
----
वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा टाकीज के पास भोपाल मप्र
फोन 9425674629