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गुरुवार, जून 27, 2013

और मोदी ने दिये दो करोड़..........

व्यंग्य
और मोदी ने दिये दो करोड़ ..............
वीरेन्द्र जैन
                पता नहीं आपको पता है कि नहीं कि उत्तराखण्ड के केदारनाथ में कितना भयानक हादसा हुआ क्योंकि आप तो क्रिकेट मैच देखने और उस पर सट्टा लगाने में व्यस्त होंगे। आपको तो यह भी पता नहीं होगा कि इस आपदा से निबटने के लिए भाजपा की चुनाव प्रचार समिति के चेयरमैन श्री नरेन्द्र मोदी ने दो करोड़ रुपये की सहायता देने की घोषणा की है।
       इस हादसे से व्यथित सेक्युलर प्रधानमंत्री मन मोहन सिंह ने सरकार की ओर से एक हजार करोड़ दिये हैं और अयोध्या में मन्दिर वहीं बनाने के लिए सोमनाथ से रथयात्रा निकलवाने के लिए अडवाणीजी को उकसाने वाले  मोदी ने दो................. करोड़ रुपये दिये हैं। मनमोहन सिंह की सरकार के पर्यटन विभाग ने सरकारी विश्राम गृहों आदि के पुनर्निर्माण के लिए सौ करोड़ दिये हैं और गुजरात के पर्यटन प्रचार के लिए अमिताभ बच्चन को ब्रांड एम्बेसडर बनाने वाले नरेन्द्र भाई मोदी ने दो करोड़ छिनक दिये हैं।
       उत्तरप्रदेश की सेक्युलर सरकार के मुख्यमंत्री ने पच्चीस करोड़ रुपये दिये हैं और गुजरात में दूसरे धर्म के मानने वाले परिवार में पैदा हुये लोगों की जड़ से सफाई करवाने वाले मोदीजी ने अपने धर्म के धर्मस्थल में हुए भीषणतम हादसे के लिए दो........ करोड़ रुपये दिये हैं।
       सेक्युलर महाराष्ट्र सरकार, हरियाणा सरकार, राजस्थान सरकार ने दस करोड़ रुपये की सहायता दी है पर गुजरात के हिन्दू ह्रदय सम्राट नरेन्द्र मोदी ने देश के एक हिन्दू तीर्थ में हुये हादसे के लिए दो करोड़ रुपये देने की उदारता प्रदर्शित की है।
       जब पिछड़े मध्यप्रदेश के भाजपा मुख्यमंत्रियों में नम्बर तीन मुख्यमंत्री तक ने पाँच करोड़ रुपये दिये हैं, तब विकास में सबसे आगे होने का ढिंढोरा पीटने वाले मोदीजी ने दो करोड़ घोषित किये हैं।
       जब टाटा समूह जो मोदी के चश्मे से देखने पर पारसियों का माना जाना चाहिए , उसने अपने सभी कर्मचारियों के एक दिन का वेतन विनम्रतापूर्वक देने का फैसला किया है जो कुल 74 करोड़ होता है तब अपने को छोटा सरदार प्रचारित करने वाले मोदीजी ने दो करोड़ दिये हैं।
       जब मौलाना मुलायम सिंह के निकट समझे जाने वाले सहारा समूह ने उत्तराखण्ड में दस हजार मकान बनवा कर देने का वादा किया है तब मोदीजी ने दो करोड़ रुपयों का दान देकर छुट्टी पा ली है। फिल्म स्टार अक्षय कुमार ने बीस करोड़ देने की घोषणा करदी व भाजपा के स्टार ने कुल दो करोड़ दिये। भोपाल की भारत हैवी एलेक्ट्रीकल्स के करमचारियों ने ही नहीं मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों ने भी मोदी द्वारा गुजरात सरकार की ओर से दी गयी रकम से ज्यादा देने की घोषणा की है।
      
       एक कहानी है कि जब एक भिखारी सारा दिन एक धर्मस्थल के बाहर बैठ कर भीख माँगता रहा पर उसके कटोरे में शाम को खाना खाने लायक पैसे भी नहीं जुटे तो वह उठकर किसी मयखाने के बाहर आकर बैठ गया। मयखाने से एक शराबी बाहर निकला और उसने उदास व भूखे भिखारी को देख कर अपनी पूरी जेब उलट दी जिसमें सौ से ज्यादा रुपये थे और यह कहता हुआ चला गया कि जाओ ऐश करो। अचम्भित भिखारी ऊपर की ओर हाथ उठाकर बोला- भगवान तू भी बहुत चालाक है, रहता कहीं और है और पता कहीं और का देता है।
       मोदीजी आप चाहें तो अपनी दो करोड़ की घोषणा से फिर भी सकते हैं, आपके बाबू बजरंगियों के काम आयेंगे।       
वीरेन्द्र जैन
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मंगलवार, सितंबर 11, 2012

व्यंग्य- प्राइम मिनिस्टर मटेरियल


व्यंग्य
प्राइम मिनिस्टर मटेरियल

वीरेन्द्र जैन

       भौतिकवाद बहुत बढ गया है। कोई आत्मा परमात्मा की बात ही नहीं करता। ढूंढने वालों ने भगवान का तत्व भी खोज लिया पर उसे भी ‘गाड पार्टिकल’ का नाम दिया। पार्टिकल, मटेरियल, सब इसी में दुनिया रंगती जा रही है। अब देखिए मोदी ने नीतिश को पीएम मटेरियल बता दिया। अरे वो गुजरात वाले मोदी नहीं, बिहार वाले मोदी जो नीतीश के ही असिस्टेंट हैं और गुजरात के मोदी के मारे अपनी नौकरी खतरे में मान कर चलते हैं, लोग कहते हैं कि जितने काले, सभी बाप के साले। पर वे सोचते हैं कि करे दाढीवाला पकड़ा जाए मूँछ वाला।
यह पुराने पीएम मटेरियल लाल कृष्ण अडवाणी जी को खुश करने का तरीका भी हो सकता है कि नितिश को तो बनना नहीं पर यह संदेश तो चला ही जाये कि बिहार का मोदी गुजरात कि मोदी को प्रधानमंत्री मटएरियल नहीं समझता। वैसे वे भीतर भीतर ये भी सोचते हैं कि अगर ये नितिश पीएम के चक्कर में उलझ जाये और  कार्यकारी मुख्यमंत्री हम हो जायें तो सारा बिहार आरएसएस वालों के नाम कर दें। अभी तो हाल यह है कि शरद यादव से लेकर जेडी[यू] का लल्लू-पंजू भी गरिया कर चला जाता है पर ऊपर से आदेश है कि कि सत्ता का दामन नहीं छोड़ना है सो गाली भी खा रहे हैं और नीचे भी पड़े हैं।
 भाजपा के स्वाभाविक मित्र बाल ठाकरे ने बिहारियों को मुम्बई से निकालने का जो हड़कम्प मचाया तो नीतिश ने उनकी मानसिक स्थिति पर टिप्पणी कर दी। इस पर ठाकरे ने सवाल पूछ लिया कि फिर वे गुजरात के मोदी को बिहार क्यों नहीं आने देते। नितिश ने कहा कि तुम तो आने की बात कर रहे हो हमने तो उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाया हुआ है। नरेन्द्र हुये या सुशील मोदी मोदी सब बराबर। संकेत बाल ठाकरे ने भी दे दिया कि वे अब अडवाणी को एनडीए का पीएम मटेरियल नहीं मानते, सो उन्होंने और ऊंची खेल दी। उन्होंने सुषमा स्वराज जी को सबसे अच्छा पीएम मटेरियल बता दिया। उनका एक गुण और भी है जो दूसरे किसी पीएम मटेरियल में नहीं हो सकता। वे राजनीति और प्रशासन में भले ही कम जानती हों पर सोनिया गान्धी के पीएम मटेरियल बनने की सम्भावनाओं पर सिर घुटा कर जमीन पर सोकर और चने खाकर जीने की धमकी दे सकती हैं या अन्ना हजारे के जेल जाने के विरोध में राजघाट पर ठुमका लगा सकती हैं। ऐसा करना क्या लालकृष्ण अडवाणीजी या नरेन्द्र मोदीजी के वश में है। पता नहीं अब नरेन्द्र मोदी का क्या होगा जिन्होंने दस बीस दर्ज़न आधी बाँह के कुर्तों का आर्डर पहले ही से दे दिया था कि प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी बनते समय काम में आयेंगे। जिन टाटा ने ममता दीदी की कृपा से अपना नैनो का कारखाना बंगाल से उठाकर गुजरात में ला पटका था तो उस समय मोदी को पीएम का सुपात्र घोषित कर दिया था वे अब क्या सोचते हैं यह पता तो तब लगेगा जब नीरा राडिया के नये टेप प्रकाश में आयें। उमाभारती ने तो अडवाणीजी को पिता तुल्य घोषित कर देने के बाद भी पीएम मटेरियल के रूप में बाबा रामदेव को सुपात्र माना था और उन्हें प्रधानमंत्री पद पर सुशोभित देखना चाहती थीं। 
       इस बरसात में खूब पानी बरसा तो जगह जगह बाढ आ गयी, दूसरी तरफ बाढ में पीएम मटेरियल भी बह बह कर खूब आ रहा है। बाढ आती है तो कचरा आता ही आता है इसमें अस्वाभाविक कुछ भी नहीं है। भाजपा प्रवक्ता ने सही कहा है कि उनकी पार्टी में तो पीएम मटेरियल भरे पड़े हैं। अकेले अडवाणीजी, सुषमाजी, मोदीजी, अरुण जैटलीजी थोड़े ही हैं जो उन्होंने नहीं कहा वह यह था कि ‘पहले बहुमत तो मिले’। जो पहले साथ में थे वे- बिछड़े सभी बारी बारी......... । तेलगु देशम तो पहले भी सरकार में साथ नहीं था, बीजू जनता दल भी नफरत से थूक कर चला गया, शिवसेना तो जब जी में आता है लतिया देता है, अकाली दल ने खुद बढ कर इनकी सीटें और वोट दोनों घटवा दिये तथा उसके द्वारा हत्यारों को ज़िन्दा शहीद घोषित किये जाने पर इन्हें मुर्दे जैसे बैठे रहना पड़ता है। यूपी में इनकी छीछालेदर इतनी हो चुकी है कि उमा भारती को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने के बाद भी जब सीटें पहले से घट गयीं और उन्हें विधानसभा में पार्टी का नेता भी नहीं बनाया तो वे शपथ ग्रहण करने के बाद एक दिन भी विधानसभा नहीं गयीं, बस चोरी छुपे मध्य प्रदेश में ‘धार्मिक’ काम करती रहती हैं। अमर सिंह भी गुम सिंह हो गये हैं जो देर रात्रि में अरुण जैटली के घर से बाहर निकलते देखे जाते थे और सपा के लिए सौदा कर आते थे। वे सक्रिय होते तो कुछ नये पीएम मटेरियल सामने लाते जैसे राष्ट्रपति पद के लिए उन्होंने झंडू बाम और नवरत्न तेल बेचने वाले का नाम सुझाया था। एक ओर जब ऐसा राष्ट्रपति 26 जनवरी की परेड की सलामी ले रहा होता तब देश के तीन सौ चैनल उसके सहारे एक रुपये में परमानन्दा करा रहे होते।
       इस बाढ को देखकर अगर मौसम के अनुकूल टिप्पणी किसी की आयी है तो वो शरद यादव की है कि पीएम का पद तो पकौड़ी हो गया है। अखबार लेकर रामभरोसे आया था और  कह रहा था पकौड़ी खिलवाओ, मैं समझ नहीं पाया कि उसे पकौड़ी खाना है या पीएम मटेरियल बनना है।     
वीरेन्द्र जैन
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शनिवार, जून 16, 2012

व्यंग्य- कारन कवन नाथ मोहि मारा


व्यंग्य
कारन कवन नाथ मोहि मारा
वीरेन्द्र जैन
       संजय जोशी निकाल बाहर किये गये। और यह मामला गुपचुप नहीं हुआ, अपितु भरी सभा में हुआ। भीष्म, गुरुद्रोण बगैरह बगैरह सब देखते रह गये और द्रोपदी का चीर हरण हो गया। द्रोपदी का चीर तो कृष्ण ने बढा दिया था पर इस महाभारत की लीला में तो कोई लीलाधर सामने नहीं आया। जिन्होंने संजय जोशी को अन्दर किया था वे ही उसे आया है सो जायेगा, राजा, रंक, फकीर की तरह बाहर जाते देखते रहे। गालिब चचा कह गये हैं कि-
निकलना खल्द से आदम का सुनते आये थे लेकिन
बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले
पर वहाँ एक कूचे के बाद दूसरी गलियाँ तो मिलती हैं, यहाँ तो जहाँ जहाँ गये वहाँ वहाँ से निकाले गये, मुम्बई से लखनऊ जाने के रास्ते को भी तय करने की कोशिश की गयी कि वो गुजरात से होकर न हो। हवा में गन्ध तक न पहुँचे। तानाशाह की शान में गुस्ताखी न पड़े। ऐसा हुआ भी पर जहाँ भेजा वहाँ भी नहीं रहने दिया गया। वहाँ से भी निकलना पड़ा। चल उड़ जा रे पंछी कि अब ये देश हुआ बेगाना। कश्मीरी पंडित तो राज्य के एक हिस्से को छोड़ कर दूसरे हिस्से में रह रहे हैं, उस पर इतनी हाय तोबा है कि सरकार को इन विस्थापित नागरिकों को गत दो दशक से  प्रतिमाह आर्थिक मदद दे रही है जो चार हजार रुपये प्रतिमाह, नौ किलो गेंहूँ, दो किलो चावल, और एक किलो चीनी तक सीमित है। धरती की जन्नत छोड़कर आने वालों को दस गुणा बारह का टीन की छत वाला एक आश्रय उपलब्ध कराया गया है। पर संजय जोशी को तो वह भी नहीं मिला। कश्मीरी पंडितों के लिए स्यापा करने वाले तो बहुत सारे रुदाले हैं पर संजय जोशी के लिए कोई आंसू नहीं बहा रहा कि कहीं मोदी न देख ले। अब वे घर के रहे न घाट के। जिन शिवराज सिंह चौहान का राजतिलक करवाया था वे भी मुँह में दही जमा कर बैठे रहे। जिन उमाभारती के साथ पार्टी में अन्दर किया गया था वे भी ध्यानमग्न हो गयीं।
       जो अपने साथी पर हुए अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठा सके वे कहते हैं कि हम जनता के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे। गर्वीले गुजरात ने मराठा साम्राज्य ध्वस्त कर दिया। अध्यक्ष ने विशेष अधिकार से सम्मेलन गुजरात में नहीं होने दिया था और अपने महाराष्ट्र में आयोजित किया, पर फिर भी चली गुजरात की।
       वैसे भाजपा में ये तो चलता ही रहता है,  यह तो मौल्लिचन्द्र शर्मा के समय से चला आ रहा है, बलराज मधोक ने तो बड़ों बड़ों के खिलाफ किताबें लिख मारी थीं पर दुर्भाग्य कि वे ब्रेल लिपि में नहीं थी और जिनकी दृष्टि बाँध दी गयी हो उन्हें क्या दिखता है? कल्याण सिंह का तो पता है, पर आज मदनलाल खुराना कहाँ हैं, उमाभारती भाजपा में तो चुहिया बनकर वापिस घुस गयीं पर उनके गुरू गोबिन्दाचार्य तो भटक भटक कर रामदेव को भजने को विवश हो गये हैं। थिंक टैंक से सड़ाँध आने लगी है। उमा भारती का भी मध्यप्रदेश निकाला हो गया है, खबरदार जो मध्यप्रदेश की धरती पर झांका। दूर से ही गाती रहो, ‘ये मेरे प्यारे वतन, ये मेरे उजड़े चमन, तुझ पर दिल कुर्बान’। अपने बीमार भाई और देव दर्शन का बहाना बना कर आना पड़ता है तब भी सरकारी सीआईडी सक्रिय रहती है।
       रामचरित मानस में बाली राम से पूछता है – मैं बैरी, सुग्रीव पियारा, कारन कवन नाथ मोहि मारा। बेचारे संजय जोशी तो यह भी नहीं पूछ पा रहे हैं। जिस मध्यप्रदेश की पुलिस से सीडी के बारे में क्लीनचिट मिली थी कहीं फिर से दबाव में आकर वही पुलिस ये न कह दे कि सीडी तो सही थी। ऐसी सीडियाँ आत्मा की तरह होती हैं जो कभी नष्ट नहीं होती भले ही उसके पात्रों को क्लीनचिट मिल गयी हो। जब क्लीनचिट मिलने के बाद भी बनवास झेलना पड़ा था तो दुबारा सीडी खुलने के बाद तो न जाने क्या होगा।
      
भले ही झूठी सही पर सवाल तो यह है कि सीडी बनवाई किसने थी और जिस सीडी को पार्टी की ही एक सरकार फर्जी बता रही है उस फर्जी काम को करवाने का सन्देही सबके सिर पर बैठ गया है। संस्कृत के एक श्लोक में कहा गया है कि जिसके पास पैसा है वही मनुष्य़ कुलीन है, वही विद्वान है, वही पंडित है, वही श्रोता है, वही गुणी है, वही सुदर्शनीय है, सारे के सारे गुण सोने में बसते हैं. [सर्वे गुणः कांचनं आसवंते]। गुजरात में आने वाली परियोजनाओं में पैसा ही पैसा है जनवरी, 2011 में महात्मा (गांधी) मंदिर में गुजरात के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी ने 100 देशों से आये 10,000 अंतर्राष्ट्रीय कारोबारियों के सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने गुजरात में 45,000 करोड़ डॉलर निवेश करने का वादा किया है। इसलिए भाजपा गुजरात को कबीर के हीरा पायो गाँठ, गठियाओ की तरह छोड़ना नहीं चाहती चाहे कुछ भी हो जाये इसलिए सारे गुण आजकल मोदी में बसते हैं, जिनके लिए संजय जोशी तो क्या अडवाणी तक को हकाला जा सकता है। नेतृत्व की हालत यह हो गयी है कि सौ सौ जूते खाँय, तमाशा घुस के देखेंगे। अडवाणीजी, प्रधानमंत्री बनें न बनें पर ब्लाग लेखक तो बन ही जायेंगे, ब्लागर्स की ओर से स्वागत है अडवाणीजी।
वीरेन्द्र जैन
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