बुधवार, मार्च 10, 2010

व्यंग्य किडनी और राज्यसभा सदस्यता के सौदे

व्यंग्य
किडनी और राज्य सभा सदस्यता के सौदे
वीरेन्द्र जैन
एक होती है किडनी, [वैसे तो एक व्यक्ति के पास किडनियाँ दो होती हैं पर किस्से कहानियों में ऐसे ही कहा जाता है] जो मनुष्यों के शरीर में पायी जाती है। इसका काम गन्दे खून को साफ करना होता है। कृपया खून को खून के अर्थ में ही लें, वैसे इसके कई अर्थ हो सकते हैं, जैसे किसी ने कहा कि मेरा स्व. प्रमोद से खून का रिश्ता था, क्योंकि मैंने उसका खून कर दिया था, या लोग अपने बच्चे की किसी सफलता पर गर्व से कहते हैं कि यह मेरा खून है तथा दूसरे के बच्चे की नालायकी पर कहते हैं कि न जाने किस कमीन का खून है आदि। अब किडनियों के बदले जाने की सुविधा हो गयी है किंतु पुराने ज़माने में किडनियाँ खराब हो जाने के बाद वैसे ही बदली नहीं जा सकतीं थीं जैसे कि आजकल के ज़माने में चाइना के माल के बारे में कहा जाता है कि -नो एक्सचेंज। यौं पहले सरज़री तो होती थी। पौराणिक गणेशजी के स्वरूप के उदाहरण को छोड़ भी दें तो भी रीतिकालीन कवि ‘कटि का कंचुक काट के कुचक मध्य धर दीन’ लिख कर कुशल सरज़री की उपस्तिथि का संकेत दे गये हैं। आते आते वो ज़माना आ गया कि किडनियाँ न केवल बदली ही जाने लगीं अपितु बाज़ार में मोबाइल सैटों की तरह बिकने भी लगीं। पिछ्ले दिनों ही दिल्ली में किडनी का धन्धा करने वालों का बड़ा रैकिट पकड़ा गया था किंतु इस हाथ ले उस हाथ दे वाले सिद्धांत के अनुसार सब कुछ रफा दफा हो गया। अब बेचारी जनता को भी चौबीस घंटे के मीडिया द्वारा रोज़ रोज़ नये नये स्टिंग दिखाये जाने लगे हैं कि वह भी ऊब चुकी है। वह बेचारी भी कितना याद रखे!

कानून ने किडनी समेत सभी अंगों के सौदों को अवैध घोषित कर रखा है पर अगर कानून के किये कुछ होता होता तो अब तक समाजवाद आ गया होता। कानून तो किताबों में लिखने और पढने की चीज़ है। उसका हाल तो वैसा है जैसा कि किसी कवि ने कहा है कि- सत्य अहिंसा दया धर्म का उनसे बस इतना नाता है दीवालों पर लिख देते हैं, दीवाली पर पुत जाता है
अगर कानून के रोके किडनी का व्यापार रुकता होता तो हमारे राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के बीच किडनी सौदे का जो सार्वजनिक विवाद चल रहा है उस पर कोई कार्यवाही हो जाती। अगर आपको याद नहीं आ रहा हो तो याद दिला दूं कि पिछले दिनों जब आज़मगढ के ठाकुर अमर सिंह ने, जिनकी ज़ुबान खुद को मुलायम सिंह का हनुमान बताते बताते नहीं सूखती थी, समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्य सभा की सदस्यता को छोड़ कर शेष सारे पदों से स्तीफा दे दिया तथा जब राज्य सभा से भी स्तीफा देने की मांग की गयी तो कहा कि पहले मेरी किडनियाँ वापिस दो, तब राज्यसभा की सदस्यता से स्तीफा दूंगा। ये सीधा सीधा किडनी का सौदा है और मानव अंग अवैध प्रत्यारोपण जैसे कानून के अंतर्गत आता है। ठाकुर अमर सिंह राजपूत जो अब अपने को यादव मरीचिका से स्वतंत्र मानते हैं अपनी किडनियाँ वापिस माँग रहे हैं।
‘ तुम मुझे किडनी दो मैं तुम्हें स्तीफा दूंगा’

अब बेचारे पहलवान मुलायम सिंह लौटाने के लिये किडनियाँ कहाँ से लायें उन्हें तो यह लग रहा है कि जैसे कोई कह रहा हो- तलाक दे तो रहे हो बड़ी अकड़ के साथ मेरा शबाब भी लौटाओगे, मेहर के साथ?

पहले वाले लोहियावादी मुलायम सिंह होते तो कह सकते थे कि किडनियाँ तो लौटा दूंगा किंतु तुमने जो मेरा दिमाग और दिल निकाल लिया है वह तो लौटा दो। जिस देश में पैसों और किडनियों की दम पर उच्च सदन चल रहे हों उस देश के मालिक तो फाइव स्टार आश्रमों में रहने वाले रास रचैय्या बाबा ही होंगे!
जय जय नित्यानन्द की जय!
वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा टाकीज के पास भोपाल मप्र
फोन 9425674629

2 टिप्‍पणियां:

  1. तुम मुझे किडनी दो, मैं तुम्हें इस्तिफा दूँगा...


    बहुत सटीक कटाक्ष!

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