बुधवार, नवंबर 04, 2009

व्यंग्य -भारतीय पीलिया पार्टी में वारयल फीवर

व्यंग्य
भारती पीलिया पार्टी में वायरल फीवर
वीरेन्द्र जैन
अंग्रेजी में एक कहावत है कि अगर डाक्टर कहता है कि आपको वायरल फीवर है तो इसका मतलब होता है कि उसे भी आपकी तरह कुछ समझ में नहीं आ रहा कि बीमारी क्या है।
वायरल फीवर को हमारे यहाँ मेहमान का दर्जा प्राप्त है जिसके बारे में भरोसा रहता है कि वह अधिक से अधिक दो चार दिन रूक कर और हमारी देह का सर्वश्रेष्ठ चर कर चला जायेगा व लुटे पिटे से हम अगले मेहमान के आने तक पुन: अपने नुकसान की भरपाई में जुट जायेंगे। रहीम ने शाायद वायरल फीवर के लिए ही कहा होगा-
रहिमन विपदा हू भली, जो थोड़े दिन होय
हित अनहित या जगत में जान परत सब कोय
पर यह वायरल फीवर अगर दूसरी बीमारियों के साथ हो तो खतरनाक भी हो सकता है जैसे कि पीलिया के साथ। इसका उदाहरण अभी हमें राजस्थान में देखने को मिला। एक भूतपूर्व महारानी जो दूसरे सैकड़ों भूतपूर्व राजे रानियों की तरह वर्तमान में भी स्वयं को रानी समझती हैं, को फिल्टर का पानी और मौसम से बचाव आदि सारी सावधानियों के बाद भी वायरल हो गया। चूंकि महारानी को हुआ था इसलिए महा वायरल हुआ होगा। छोटे मोटे लोगों को डाक्टर दो तीन दिन में ही ठीक मान लेते हैं किंतु महारानी का महावायरल दो हफ्ते वाला था। उनके डाक्टर ने उन्हें दो हफ्ते तक सख्त आराम की सलाह दी दी। मजदूर तो वायरल में भी काम करते रहते हैं पर महारानी इतनी महाअशक्त हो गयीं कि बेचारी अपने डाक्टर की सलाह से दो सप्ताह में एक कागज पर दस्तखत करने तक की हिम्मत नहीं जुटा सकीं। वह कागज उनके विधानसभा में विपक्ष के नेता पद से त्याग पत्र पर छोटे से दस्तखत करने के सम्बंध में था जिसके लिए वे पहले ही मौखिक सहमति दे चुकी थीं। उनके त्यागपत्र पर दस्तखत न करने से स्तीफा मांगने वाले हाई कमान की इज्जत, लोकसभा चुनाव के बाद जितनी भी बची रह गयी हो, मिट्टी में मिल चुकी थी और मिट्टी अपनी इज्जत के लिए परेशाान हो रही थी। वे दो सप्ताह में पहले ठीक हुयीं फिर स्वस्थ हुयीं और तब इस लायक हुयीं कि पूर्व उपप्रधानमंत्री तथा निरंतर पंधानमंत्री पद प्रत्याशाी से मिलने के बाद स्तीफे पर अपने दस्तखत बना सकीं। उधर अपनी इज्जत को मिट्टी में मिलाये अध्यक्ष महोदय कहते रह गये
की उसने मेरे कत्ल के बाद कत्ल से तौबा
हाय उस वादा पशेमां का पशेमां होना
एक बार तो इसी पार्टी के एक अध्यक्ष अपनी पार्टी की एक साध्वी से इतना परेशाान हो गये थे कि उनकी पत्नी बीमार पड़ गयीं। प्रेम में ऐसा ही होता है कि बाबर ठीक हो जाता है और हुमांयुं बीमार हो जाता है। अपनी पत्नी की सेवा सुश्रूषाा के लिए पाटी अध्यक्ष ने त्यागपत्र मुँह पर मारने में दो सप्ताह का समय नहीं लिया और फटाक से दे मारा। पर साध्वी नीम चढे करेले का रस पीकर ही बोलने के लिए मशहूर थीं और बीमार की बीमारी का पूरा इतिहास रखती थीं सो उन्होंने देशा की जनता को बताना जरूरी समझा कि पार्टी अध्यक्ष ने अपनी पत्नी की रजोनिवृत्ति को राष्ट्रीय बीमारी बना दिया है। ये भारतीय संस्कृति की जनशक्ति वाली साध्वी थीं और अपनी बात पूरी शाक्ति से कहने की आदी थीं भले ही वह सही हो या गलत! उधर अध्यक्ष महोदय भी इतने सेवाभावी थे कि उसके बाद उन्होंने पार्टी में उपाध्यक्ष पद स्वीकार कर लिया जिससे बीमार पत्नी और बीमार पार्टी दोनों की ही सेवा कर सकें।
बीमारी में अगर राजनीति मिल जाती है तो वह बीमारी बहुचर्चित हो जाती है। गुजरात के एक पूर्व मुख्यमंत्री की पत्नी की बीमारी पर जब ढेर सारे मंत्रियों और विधायकों ने एक साथ मिजाजपुर्सी की तो मुख्यमंत्री के कान खड़े हो गये जो विधायकों की दीवारों में लगे रहते थे। उन्हें अपनी कुर्सी डगमग नजर आने लगी तो वे अपनी पार्टी में अपने सबसे बड़े विरोधी के यहॉ बाकी के मंत्रियों को लेकर मिजाजपुर्सी के लिए पहुँच गये। अगर सब एक साथ गये होते तो वहाँ मंत्रिमंडल की बैठक हो सकती थी।
पर जनता की मिजाज पुर्सी की किसी को चिंता नहीं है जो कराह करह कर कह रही है कि-
अच्छे ईसा हो मरीजों का ख्याल अच्छा है
हम मरे जाते हें, तुम कहते हो हाल अच्छा है
वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा टाकीज के पास भोपाल (मप्र)

4 टिप्‍पणियां:

  1. वायरल ठीक है अपनी जगह पर परन्तु अन्दरूनी हालात बताते हैं कि इस कुनबे के रक्त में प्लेटलेट्स की कमी हो गई हैं जो कि उन्हें पता ही नहीं है। इस लक्षण को डेंगू कहा जाता है जिसका मरीज तुरंत प्लेटलेट्स की व्यवस्था ना होने से मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।

    प्रमोद ताम्बट
    भोपाल

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  2. बीरेन्दर जी, वाइरस-वाइरस तो मामूली बात है। लाल पार्टियाँ कोमें में चल रहीं हैं और आप वाइरस का 'रूसी इलाज' खोजने में लगे हुए हैं। बचाइये नहीं तो भारत में चीन समर्थकों की भारी कमी हो जायेगी।

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