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शनिवार, नवंबर 13, 2010

laghukathaa raajaa kee nangaee राजा की नंगई

लघुकथा
राजा की नंगई
वीरेन्द्र जैन
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राजा नंगा है। उपदेश कथा में यह कहने का साहस एक बच्चे को छोड़कर किसी को भी नहीं हुआ था। कथा में उसका बाप उसे बार बार चुप कराने की कोशिश कर रहा था। सब राजा के तथाकथित वस्त्रों की तारीफ करके स्वयं की रक्षा कर रहे थे। अब समय दूसरा है। सारे के सारे लोग कह रहे हैं कि राजा नंगा है और चाहें तो राजा के नंगे होने की जाँच करा के देख लें। पर महाराजा और उसके बच्चे सारा सच जान समझ कर भी कह रहे हैं कि नहीं राजा नंगा नहीं है।
महाराजा ने अगर राजा को नंगा कह दिया तो उसके खुद नंगे हो जाने की सम्भावना है।
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वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड अप्सरा टाकीज के पास भोपाल [म.प्र.] 462023
मो. 9425674629

रविवार, जुलाई 18, 2010

लघुकथा -नाक और गरदन कटिंग बनाम आनर किलिंग


लघु कथा [व्यंग्य]
नाक और गरदन कटिंग बनाम आनर किलिंग
वीरेन्द्र जैन
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”मैं उन दोनों को मार डालूंगा” वे गुस्से में भरे हुये थे। ”
क्या बात हो गयी किस को मार डालोगे?” मैंने पूछा
”अपनी बेटी और उस हरामी की औलाद जिससे उसने शादी कर ली है” उन्होंने गुस्से में फनफनाते हुए कहा। गुस्से के मारे उनके मुँह से झाग निकल रहे थे, आँखें फटी पड़ रही थीं। वे दुर्वासा के साक्षात रूप बने हुए थे, पर उनमें श्राप देने की क्षमता नहीं थी इसलिए सीधे सजा देने पर उतर आये थे। किसी जमाने के कथा कहानी में ये बीच का रास्ता हुआ करता था जो अब खतम हो गया है।
” अरे भाई दोनों ही पढे लिखे हैं, दोनों ही नौकरी करते हैं, हमउम्र हैं, एक दूसरे को पसन्द करते हैं, और फिर तुम्हारी ही जाति के हैं इस पर तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि दहेज भी नहीं देना पड़ा और हर तरह से योग्य दामाद भी घर बैठे मिल गया। दावत देने वाली बात पर तुम उन्हें सजा दे रहे हो।“
” पर दोनों का गोत्र तो एक ही है”
”होगा यार अपने हिन्दुओं को छोड़ कर और कौन गोत्र की चिंता करता है, पर उनकी शादियाँ भी सफल होती हैं और उनका औसत स्वास्थ भी अपने औसत स्वास्थ से अच्छा ही रहता है ”
” पर ये जो अपने समाज में मेरी नाक कट रही है सो.........?” उन्होंने आखिरी शब्द पर अतिरिक्त जोर देकर कहा।
” तो अपनी नाक के लिए तुम उनकी गरदन काट दोगे, अपनी बेटी दामाद की जान ले लोगे! और फिर ये गैर कानूनी भी है, कहाँ तक भागोगे, अंततः पुलिस की गिरफ्त में आओगे, हथकड़ियाँ पहिन कर अदालत में जाओगे, अपनी बेटी दामाद के हत्यारे कहलाओगे तो क्या तुम्हारी नाक नहीं कटेगी”
” हाँ.................... नहीं कटेगी, हत्या करने पर समाज में नाक नहीं कटती पर गोत्र में शादी करने पर कटती है” वे गुस्से में बोले।

वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड अप्सरा टाकीज के पास भोपाल [म.प्र.] 462023
मो. 9425674629

बुधवार, मई 19, 2010

व्यंग्य - प्लेटफार्म पर मौतें

व्यंग्य प्लेटफार्म पर मौत
वीरेन्द्र जैन
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मैं आत्महत्या करने जा रहा हूँ
कहाँ ?
रेलवे स्टेशन पर
पर सारी दुनिया में आत्महत्या करने के लिए लोग स्टेशन पर नहीं रेल की पटरियों पर जाते हैं।
जाते होंगे, पर यह हिन्दुस्तान है, यहाँ लोग प्लेटफार्म पर भी मर सकते हैं।


वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड अप्सरा टाकीज के पास भोपाल [म.प्र.] 462023
मो. 9425674629

गुरुवार, अप्रैल 08, 2010

लघुकथा[व्यंग्य] अनुशासित टिकिटार्थी

लघुकथा[व्यंग्य]
अनुशासित टिकिटार्थी
वीरेन्द्र जैन
देश में अचानक चुनाव आ गये थे। बिना न्यूनतम साझा कार्यक्रम के गठबन्धन बनाने पर चुनाव भी मौत की तरह कभी आ सकते हैं। ताबड़तोड़ चुनावी तैय्यारीं शुरू हो गयीं। हमारे देश में चुनाव आने पर सबसे पहले अपने ही दल के लोगों से टकराना पड़ता है क्योंकि अपना टिकिट पाने के लिए दूसरे का कटवाना ज़रूरी होता है। सबसे पहले दूसरे टिकिट चाहने वालों के दबे छुपे सारे अवगुण उज़ागर करने होते हैं और अपने गुण बताने होते हैं।
एक राष्ट्रवादी, हिन्दुत्ववादी, दल के ऐसे ही एक प्रत्याशी ने अपने दल की वरिष्ठ उपाध्यक्ष जो एक प्रसिद्ध नृत्यांगना और फिल्म अभिनेत्री हैं, को अपना बायोडेटा भेजते समय विशेष उल्लेख में लिखा-
बैंक खाता - बैंक ओफ राजस्थान
पानी - हमेशा केंट का
पत्रिका - मेरी सहेली
नहाने का साबुन - पियर्स सोप
पसन्दीदा फिल्में - शोले, चरस, सीता और गीता, जुगुनू, बर्निंग ट्रेन, त्रिशूल ,जोशीला, लाल पत्थर, बाग़वान, वीर ज़ारा आदि अतिरिक्त
पसन्दीदा टीवी शो - लाफ्टर चैलेंज[सिद्धू वाला]
शराब - डिप्लोमट /बैग पाइपर्[शत्रुघ्न सिन्हा निर्देशित]
कपड़े धोने का साबुन - निरमा[दीपिका चिखलिया वाला]
आवेदक ने बैंक आफ राजस्थान की पास बुक की फोटोकापी, साबुनों के रेपर, पत्रिका का कवर पेज, सिनेमा के फटे हुये टिकिट और वाटर फिल्टर की रशीद संलग्न की। अब वह टिकिट की प्रतीक्षा में रामायण पाठ में लगा हुआ है। उसे भरोसा है कि टिकिट मिल ही जायेगा।
वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा टाकीज के पास भोपाल मप्र
फोन 9425674629

सोमवार, नवंबर 23, 2009

लघुकथा (व्यंग्य) नेता सुअर बुखार और हाथों की सफाई


लघुकथा
नेता, सुअर बुखार और हाथों की सफाई
वीरेन्द्र जैन
बच्चा बड़ी गौर से दूरदर्शन में बच्चों के लिये बनाया गया एक विज्ञापन देख रहा था । विज्ञापन में बताया गया था कि आप खांसने छींकने और बाहर से आने के बाद अगर अपने हाथ धोते हैं तो इंफेक्शन से बच कर सुअर बुखार से बच सकते हैं और लाखों जानें बचा सकते हैं। थोड़ी ही देर बाद उस चैनल पर समाचार आने लगे जिसमें बताया गया कि दुनिया में जिस इकलौते राजनेता को सुअर बुखार ने अपनी गिरफ्त में लिया वे हमारे देश के एक विकसित प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। विज्ञापन के प्रभाव में आये बच्चे ने अपने पिता से पूछा कि क्या उक्त नेता हाथ नहीं धोता!
हाँ बेटा इस नेता ने 2002 से अपने हाथ नहीं धोये हैं और यह तभी से अपने गंदे हाथ लिये राज्य सरकार चला रहा है इसीलिये तो दूरदर्शन कहता है कि अपने हाथ धोना चाहिये- पिता ने बेटे को समझाया।
जो नेता हाथ धोते हैं वे कौन से साबुन से हाथ धोते हैं? बेटे ने फिर पूछा
वे क्षमा याचना ब्रांड साबुन से हाथ धोते हैं और खाने पीने व अपने बच्चों को दुलारने के बाद फिर से हाथ गंदे करने निकल जाते हैं- पिता ने बताया।
क्या हम हाथ गंदे करने से बच नहीं सकते!- बेटे की अगली जिज्ञासा थी।
बच सकते हैं, पर उसके लिये पूरे देश में सफाई करना पड़ेगी- पिता ने ठंडी सांस भरकर कहा। बेटे को समझ में नहीं आया कि पूरे देश में सफाई के नाम पर पिता ने ठंडी सांस क्यों भरी।

वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
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