सोमवार, जुलाई 13, 2009

पत्नी के मायके जाने पर - कुछ नोट्स

व्यंग्य
पत्नी के मैके जाने पर
वीरेन्द्र जैन

पत्नी ज्ञान की दुशमन होती है, खास तौर से अंर्तज्ञान की। यही कारण है कि अंर्तज्ञान प्राप्त करने वाले बड़े बडे महापुरूषों ने ज्ञान पाने के लिए सबसे पहला काम यही किया कि पत्नी से छुटकारा लिया। बहुत ही छोटी छोटी बातें जो हम अपनी ऑखों में पत्नी रूपी धुंध लगे होने के कारण देख नही पाते वे धुंध छॅटने पर साफ नजर आने लगती हैं, यद्यपि कुछ की सूची मैंं यहॉ गिना रहा हूं पर 'हरि अनंत हरि कथा अनंता' की तरह यह सूची का कुछ मामूली-सा ही हिस्सा है।
सावन में पत्नी मायके जाने के लिए उतावली रहती है। पत्नी का मैका प्रेम बहुत सुखकारी है, वह कम से कम सावधिक ही सही स्वतंत्रता तो देता है। पत्नी के मैके जाने पर हमें पता चलता है-
1- कि मुहल्ले में काफी लड़कियॉ जवान हो गई हैं।
2- कि मुहल्ले में किससे किसका क्या चल रहा है।
3- कि इन्टर नैट के कुछ और भी उपयोग हैं।
4- कि श्रीमती अवस्थी, हमारी पत्नी के न होने पर हमारे ड्राइंगरूम में आना पंसद नही करतीं, वैसे चाहे सारे दिन चबर चबर करती रहें।
5- कि चावला साहब की मिसेज किसी काम की खातिर लड़की के बजाय लडके को भेजना क्यों शुरू कर देती हैं।
श- कि मुहल्ले में धूल बहुत उड़ती हैं और केवल महरी द्वारा की गई झाडू- बुहारी से सफाई नही रखी जा सकती।
7- कि मकड़ियां अब भी पाई जाती हैं और उनका प्रमुख काम निरंतर जाले लगाकर किंग बू्र्सों को प्रेरणा देना है।
8- कि तकिए के लिहाफ कितने दिन में गंदे हो जाते हैं।
9- कि हमें किसी समय शंतरज खेलना भी आता था।
10- कि आकाश कितना बड़ा है, और सुंदर भी।
11- कि अभी तो मैं जवान हूॅ।
12- कि होटल वाले इतने धनवान क्यों होते जा रहे हैं।
13- कि मंहगाई सचमुच बहुत बढ़ गई है, और पत्नी घरखर्च में से उतना नहीं बचाती जितने का हमें अनुमान था।
14- कि नींद न आने के और क्या क्या कारण हो सकते हैं।
15- कि समाज अभी बहुत दकियानूस और पिछड़ा हुआ है।
1श- कि अखबार में ''नगर में आज'' के अंन्तर्गत जो कार्यक्रम घोषित होते हैं वे वास्तव में भी होते हैं।
17- कि दोस्त लोग चाय पिलाने के बाद पान खिलाने के बहाने बाहर चौराहे तक लाकर क्याें नमस्ते कर लेते हैं।
18- कि स्थायी रूप से स्वतंत्र दोस्त अस्थायी स्वतंत्र लोगों को दोस्त बनाने पर ज्यादा, भरोसा नहीं करते कि जाने कब इसका खूंटा आ जाये और ये खाया पिया चुकाने का समय आने के पूर्व ही कन्नी काट ले।
19- कि घर-बार वाला घर केवल ''बार'' होकर कैसे रह जाता है।
20- कि सात नंबर की बस चूक जाने से कोई कयामत नहीं आ जाने वाली, दूसरी और बसें भी कालोनी को जाती हैं।
21- कि लंच टाइम में कैंटीन में बहुत भीड़ होती है।
22- कि बिना लंच बाक्स लिए हुए बस का सफर ज्यादा सुविधाजनक होता है।
23- कि दूधवाला सुबह- सुबह नींद खराब करता है।
24- कि समय पर आपके घर न मिलने पर महरी उतना ही बडबड़ाती है जितना कि आप उसके न आने पर।
25- कि फ्रिज घर की एक मौलिक आवश्यकता है, जिसके बिना आप नहीं रह सकते।
2श- कि मौके पर मिल सकें इसलिए चीजें संभाल कर रखी जानी चाहिए।
27- कि बाजार से लाई हुई सौंफ में बहुत कचरा होता है।
28- कि जैसे आवशयकता अविष्कार की जननी है वैसे ही सुविधा आदतों की जननी है
29- कि यह आवशयक नही कि आप शांत समय में अधिक लिख- पढ़ सकें।
30- कि घरेलू सामान खरीदने और अखबार की रद्दी व खाली बोतलें बेचने के मामले में पुरूष नारी से ज्यादा अबला होता है।
31- कि पहली तारिख को कलैंडर बदलना होता है।
32- कि नहाने के बाद अंडरवियर- बनियान धोने में नहाने का सारा मजा जाता रहता है।
33- कि आटा मॉढते समय दक्षिण भारतीय लोगों के चावल खाने की आदत के प्रति श्रद्वा जागती है।
34- कि यूरोप वालों की फूड हैबिट्स हमसे बैटर और कम टाइम कंज्यूमिंग होती हैं।
35- कि घर पर कपड़ा धोने का एक लाभ यह भी हैं कि बाल्टियॉ अपने- आप धुल जाती हैं।
3श- कि मुहल्ले की महिलाओं के पास पूछने के लिए केवल एक ही सवाल बाकी बचा है- कि भाभी जी कब आ रही हैं?।
और अंत में -
37- कि आखिर जैसा भी हो अब तो पत्नी को लौट ही आना चाहिए।

1 टिप्पणी:

  1. आपको बोध की प्राप्ति हो गई!!! जय हो!

    सिद्धार्थ यही जानने जंगल गये थे और फिर गौतम बुद्ध कहलाये!!

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