शुक्रवार, सितंबर 25, 2009

व्यंग्य चाँद पर पानी की खोज

व्यंग्य
चाँद पर पानी की खोज
वीरेन्द्र जैन
बधाई हो
बधाई हो
बधाई हो
बधाई हो
''काहे की बधाई दे रहे हो रामभरोसे?'' मैंने सुबह सुबह राम भरोसे को बधाइयां देते लेते देख कर पूछा। उसके हाथ में कई अखबार थे।
''तुम्हें दुनिया की कुछ खबर तो रहती नहीं, क्या आज का अखबार नहीं देखा जिसमें हमारे वैज्ञानिकों ने सबसे पहले चाँद पर पानी खोज लिया है।''
'' क्या तुम्हारे जैसे किसी पंडित को चाँद पर ले गये थे जिसने पूजा पाठ कर के पानी खोज लिया?'' मैंने कहा
''तुम तो हाथ धोकर दिन रात पंडितों के पीछे पड़े रहते हो, बेचारे किसी तरह रो धोकर अपना डूबता धन्धा सम्हाले हुये हैं सो तुम्हें वो भी नहीं सुहाता। अरे भाई पंडितों ने नहीं वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है। हमारे वैज्ञानिकों ने और तुम खुश हो जाओ कि उन सैकड़ों वैज्ञानिकों में भी दो प्रतिशत भी ब्राम्हण नहीं थे। अपुन ने वो जो चन्द्रयान-1 भेजा था उसी के मिनरलौजी मैपर ने संकेत भेजे हैं।'' वह बोला
'' पर उस चन्द्रयान ने तो काम करना बन्द कर दिया था।''
''हाँ कर दिया था पर ये सूचनाएं पहले भेज दी गयी थीं जिनका विश्लेषण अब हुआ है।''
'' पर हमारे वैज्ञानिक धरती पर पानी क्यों नहीं ढूंढ पाते! अब क्या हम चाँद से टैंकर बुलवायेंगे?'' अन्दर से मेरी पत्नी ने कहा
'' तुम भी भाभी इनके साथ रह कर इन जैसा ही सोचने लगी हो, इस उपलब्धि पर मिठाई खिलाने की जगह इनकी ही तरह नकारात्मक बातें कर रही हो। देखती नहीं कि हमारे प्रधानमंत्री ने अपनी इस उपलब्धि पर किस तरह देश को बधाइयाँ दी थीं और उसे चुनाव के दौरान भी बताया था।'' उसने शिकायत भरे स्वर में मेरी पत्नी से कहा।
'' हाँ और चुनाव के बाद ही वह चन्द्रयान हजारों करोड़ रूपयों समेत डूब गया। क्या पता कोई संथानम कल के दिन ये रहस्य भी बता दे या कोई जसवंत सिंह सारे कच्चे चिट्ठे खोल दे कि वह तो चुनावों के पहले ही फेल हो गया था।'' मैंने उसे छेड़ा।
''तुम हमेशा ही गलत दिशा में सोचते हो'' वह सचमुच भिनक गया।
'' हम तो इतना जानते हैं कि हमारी सरकार स्विस बैंक के खाते दारों को नहीं खोज पाती और जो स्विजरलैंड इसी धरती पर है उसके खातों का पता नहीं लगा पाती, भाजपा कार्यालय में हुयी चोरी में गये करोड़ों रूपयों का पता नहीं लगा पाती, अरूषि कांड के हत्यारों को नहीं खोज पाती, संसद में चालीस लाख लोगों द्वारा सीधे प्रसारण में सांसदों द्वारा लाये गये करोड़ों रूप्यों के स्त्रोत का पता नहीं चला पाती और ना ही उन सांसदों से पूछताछ ही कर पाती है, न अपने एक वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्री की नारको टैस्ट की सलाह ही मान पाती है। देश में छुपा कई लाख करोड़ का काला धन बरामद नहीं कर पाती, जंगलों में छुपे आतंकवादी नहीं खोज पाती वह फेल चन्द्रयान से चाँद पर पानी खोज लेती है।''
''तुम कहना क्या चाहते हो?'' वह बिफरा
'' मैं क्या कहूँगा पर किसी शायर ने कहा है-
हम चाँद के बीराने को आबाद करें क्यों
इस धरती पर भी क्या कहीं वीराने नहीं हैं
जिन हाथों ने मयखानों की दीवार रखी है
ये सच है उन्हीं हाथों में पैमाने नहीं हैं
''तो क्या अमरीका और रूस बेबकूफ थे जिन्होंने पहले कुत्ता कुतिया और फिर आदमी चाँद पर भेजे''
'' पर क्या वहाँ भी हमारे यहाँ जैसे हालात थे? अब मान लो हमारा चाँद पर कब्जा भी हो गया तो नेताओं से सांठगांठ करने वाला माफिया वहाँ भी प्लॉट काटने लगेगा और भारत भवन पर सीमेंट के होर्डिंग लगाने वाले वहाँ भी अपना सीमेंट सप्लाई करवा दें भले ही वहाँ की चिमनियाँ भी पतित होने लगें''
रामभरासे ने अपने अखबार समेटे और बिना चाय पिये चला गया।
वीरेन्द्र जैन
२/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा टाकीज के पास भोपाल मप्र
फोन 9425674629

3 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया व्यंग्य . बधाई देने लेने वाले सात जन्मो तक चाँद पर न पहुँच पाएंगे. अभी तकनीक इतनी एडवांस नहीं है की सभी चाँद पर पहुँच जायेंगे. टी.वी. वालो को भी खूब मसाला मिल गया है वो चाँद पर कालोनी बनाने जा रहे है ........ यहाँ लोगो के नलों में पानी नहीं आता है और भाई लोग चाँद पे पानी मिलने की खुशियाँ मना रहे है . .

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  2. चांद पर पानी ब्लॉग की जुबानी

    मिल गया, मिल गया चांद पर पानी और ब्लॉग के लिए कहानी. आज भले ही आपके यहां पानी की क्राइसिस हो लेकिन चांद पर पानी ही पानी है. वैसे पानी को लेकर आजकल इसरो की बल्ल-बल्ले है. हर तरफ से बधाइयां आ रही हैं. नासा ने बधाई दी, देशवासी ने भी बधाइ दी. इसरो ने भी सबको पलट कर बधाई दी. लेकिन असली हीरो तो चंद्रयान-१ है जो 'वाट' लगने के बाद भी 'वाटर' दे गया.
    ब्लॉग जगत में भी खूब पानी है. चांद पर पानी मिलने के बाद हर कोई इस पर ज्ञान बघार रहा है. कोई गंभीर राय दे रहा है, कोई व्यंग्य दाग रहा है, कोई कार्टून बना रहा है तो कोई चिकोटी काट रहा है.
    एक ब्लॉगर है वीरेंद्र जैन. पहले बैंक में नोट गिनते थे लेकिन अब व्यंग्य का खोमचा लगाते हैं. अपनी रचनाएं चिकोटी काट कर पढ़वाते हैं. जैसे एक सुबह अचानक ढेर सारे अखबारों के फ्रंट पेज पर बड़ा सा चांद और चंद्रयान राम भरोसे मारे खुशी के पड़ोसी को बधाई देने जा पहुंचे. पड़ोसी ने उत्साहित होने के बजाए इस खबर को बड़े ठंडे अंदाज में लिया और कहा कि चंद्रयान -१ में मून मिनरोलॉजी मैपर (एम ३) तो नासा ने लगाया था, आप काहे खुश हो. रही-सही कसर उनकी पत्नी ने यह सवाल उठा कर पूरी कर दी कि हमारे वैज्ञानिक धरती पर तो पानी खोज नहीं पाते चंाद से क्या टैंकर भेजेंगे. राम भरोसे तुनक कर बिना चाय पीए ही चले गए. सुबह-सुबह निगेटिव सोच वाले लोगों के यहां नाहक गए. अब राम भरोसे को क्या पता कि पड़ोसी के यहां उस समय पानी नहीं आ रहा होगा. उनके उत्साह ने जले पर पानी छिड़कने जैसा असर किया. अपको भी चिकोटी का मजा लेना है तो Rvirendra-jain.blogspot.com पर क्लिक करिए पानी जरूर मिलेगा. पिछले कुछ दिनों में ढेर सारे ब्लॉगरों का पसंदीदा सब्जेक्ट रहा है चंाद पर पानी. खासकर व्यंग्य लिखने ब्लॉगरों ने तो इस पर खूब चुटकियां ली हैं. अरे... लगता है पानी आ गया, चांद की बात बाद में पहले आप फाटफट नहा लीजिए.

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